केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में प्रत्येक वेतन आयोग के बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वर्ष 1986 में चौथे वेतन आयोग के तहत सबसे निचले स्तर का न्यूनतम मूल वेतन केवल ₹750 प्रतिमाह था। सातवें वेतन आयोग में यही न्यूनतम बेसिक पे बढ़कर ₹18,000 प्रतिमाह हो गया।

इस तरह 1986 से 2016 के बीच केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 24 गुना हो गया। रुपये में देखें तो इसमें ₹17,250 और प्रतिशत के आधार पर लगभग 2,300 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि यह तुलना न्यूनतम basic pay की है, हर कर्मचारी की वास्तविक या इन-हैंड सैलरी की नहीं।
1986 से 2016 तक कितना बढ़ा न्यूनतम मूल वेतन?
| वेतन आयोग | प्रभावी वर्ष | न्यूनतम मूल वेतन | पिछले आयोग से वृद्धि | प्रतिशत वृद्धि |
|---|---|---|---|---|
| चौथा वेतन आयोग | 1986 | ₹750 | — | — |
| पांचवां वेतन आयोग | 1996 | ₹2,550 | ₹1,800 | 240% |
| छठा वेतन आयोग | 2006 | ₹7,000 | ₹4,450 | लगभग 174.5% |
| सातवां वेतन आयोग | 2016 | ₹18,000 | ₹11,000 | लगभग 157.1% |
भारत सरकार के पेंशनर्स पोर्टल पर उपलब्ध चौथे से सातवें वेतन आयोग की वेतन-संरचना में पुराने वेतनमान और उनके संशोधित स्तर दिए गए हैं। सातवें वेतन आयोग पर केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले में भी न्यूनतम वेतन को ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 किए जाने की पुष्टि की गई थी। वित्त मंत्रालय का आधिकारिक निर्णय यहां देखा जा सकता है।
चौथा वेतन आयोग: 1986 में न्यूनतम वेतन ₹750
चौथे केंद्रीय वेतन आयोग की संशोधित वेतन व्यवस्था 1 जनवरी 1986 से प्रभावी हुई थी। सबसे निचले स्तर का वेतनमान ₹750 से शुरू होता था, जबकि शीर्ष स्तर का वेतन लगभग ₹9,000 प्रतिमाह था।
उस समय कर्मचारियों की कुल आय में बेसिक पे के साथ महंगाई भत्ता और दूसरे भत्ते भी शामिल होते थे। इसलिए ₹750 को उस समय मिलने वाली पूरी सैलरी नहीं माना जाना चाहिए। यह केवल न्यूनतम शुरुआती मूल वेतन था।
पांचवां वेतन आयोग: ₹750 से बढ़कर ₹2,550 हुआ वेतन
पांचवें वेतन आयोग की वेतन-संरचना 1 जनवरी 1996 से प्रभावी की गई। सबसे निचला वेतनमान ₹2,550 से शुरू हुआ। चौथे वेतन आयोग के ₹750 की तुलना में यह ₹1,800 अधिक था।
प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम मूल वेतन में 240 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। इसका अर्थ है कि नया न्यूनतम वेतन पुराने वेतन का लगभग 3.4 गुना हो गया।
पांचवें वेतन आयोग में वेतन निर्धारण के दौरान पुराने बेसिक पे, महंगाई भत्ते और फिटमेंट लाभ को नई संरचना में समायोजित किया गया था। इसलिए किसी मौजूदा कर्मचारी की वास्तविक बढ़ोतरी केवल ₹750 और ₹2,550 के अंतर से तय नहीं हुई थी।
छठा वेतन आयोग: न्यूनतम पे ₹7,000 तक पहुंचा
छठे वेतन आयोग की संशोधित वेतन व्यवस्था 1 जनवरी 2006 से प्रभावी मानी गई। इस आयोग में पारंपरिक वेतनमानों के स्थान पर Pay Band और Grade Pay व्यवस्था लागू की गई थी।
सबसे निचले नियमित स्तर पर ₹5,200 का पे-बैंड और ₹1,800 का ग्रेड पे मिलाकर न्यूनतम वेतन ₹7,000 निर्धारित हुआ। पांचवें वेतन आयोग के ₹2,550 से इसकी तुलना करने पर ₹4,450 की वृद्धि होती है।
इस आधार पर न्यूनतम मूल वेतन लगभग 174.5 प्रतिशत बढ़ा और पुराने वेतन का करीब 2.75 गुना हो गया।
छठे वेतन आयोग की सिफारिशें वर्ष 2008 में लागू हुईं, लेकिन संशोधित वेतन का वित्तीय प्रभाव 1 जनवरी 2006 से दिया गया था। कुछ भत्तों की प्रभावी तारीख अलग थी।
सातवां वेतन आयोग: न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000
सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की वेतन-संरचना 1 जनवरी 2016 से प्रभावी हुई। इसमें Pay Band और Grade Pay को हटाकर नई Pay Matrix लागू की गई।
सबसे निचले Level-1 का शुरुआती मूल वेतन ₹18,000 निर्धारित किया गया। छठे वेतन आयोग के ₹7,000 की तुलना में इसमें ₹11,000 की बढ़ोतरी हुई।
प्रतिशत में देखें तो न्यूनतम मूल वेतन में लगभग 157.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यानी नया न्यूनतम बेसिक पे पुराने न्यूनतम वेतन का लगभग 2.57 गुना हो गया।
सातवें वेतन आयोग की विस्तृत सिफारिशें वित्त मंत्रालय की आधिकारिक 7th CPC रिपोर्ट में उपलब्ध हैं।
अधिकतम वेतन में कितना बदलाव आया?
न्यूनतम वेतन के साथ शीर्ष स्तर के मूल वेतन में भी प्रत्येक आयोग के बाद बड़ी वृद्धि हुई।
| वेतन आयोग | न्यूनतम मूल वेतन | अधिकतम मूल वेतन |
|---|---|---|
| चौथा वेतन आयोग | ₹750 | ₹9,000 |
| पांचवां वेतन आयोग | ₹2,550 | ₹26,000 |
| छठा वेतन आयोग | ₹7,000 | ₹80,000 |
| सातवां वेतन आयोग | ₹18,000 | ₹2,50,000 |
सातवें वेतन आयोग में शीर्ष स्तर का ₹2.50 लाख मूल वेतन कैबिनेट सचिव जैसे सर्वोच्च पद के लिए निर्धारित किया गया था। सभी कर्मचारियों की सैलरी इस स्तर तक नहीं पहुंचती।
30 वर्षों में कितनी बढ़ी कर्मचारियों की सैलरी?
यदि केवल सबसे निचले मूल वेतन की तुलना करें तो गणना इस प्रकार बनती है:
- वर्ष 1986 का न्यूनतम मूल वेतन: ₹750
- वर्ष 2016 का न्यूनतम मूल वेतन: ₹18,000
- रुपये में कुल वृद्धि: ₹17,250
- नया वेतन पुराने वेतन का: 24 गुना
- कुल प्रतिशत वृद्धि: 2,300 प्रतिशत
इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक कर्मचारी की वास्तविक सैलरी ठीक 2,300 प्रतिशत बढ़ी। यह अलग-अलग वर्षों में लागू न्यूनतम प्रवेश वेतन की सीधी तुलना है।
क्या वेतन आयोग आते ही सैलरी उतने प्रतिशत बढ़ जाती है?
नहीं। न्यूनतम वेतन में दिखाई देने वाली प्रतिशत वृद्धि और किसी कार्यरत कर्मचारी की वास्तविक सैलरी वृद्धि दो अलग बातें हैं।
नया वेतन निर्धारित करते समय कर्मचारी का पुराना बेसिक पे, पद, वेतन स्तर, फिटमेंट नियम और अगली उपलब्ध सेल देखी जाती है। पुरानी व्यवस्था का DA भी नई बेसिक सैलरी में समाहित किया जा सकता है। इसके बाद नई व्यवस्था में DA सामान्यतः दोबारा शून्य से शुरू होता है।
इसलिए ₹7,000 से ₹18,000 होने का अर्थ यह नहीं है कि हर कर्मचारी की उस समय मिलने वाली कुल सैलरी सीधे 157 प्रतिशत बढ़ गई थी। ₹7,000 पुरानी न्यूनतम बेसिक पे थी, जबकि कर्मचारी को इसके अतिरिक्त लागू DA और दूसरे भत्ते भी मिल रहे थे।
Basic Pay और In-Hand Salary में अंतर
Basic pay कर्मचारी के वेतन का मूल हिस्सा होता है। इसी के आधार पर DA, HRA और कुछ अन्य लाभों की गणना की जाती है।
कुल वेतन में सामान्यतः ये हिस्से शामिल हो सकते हैं:
- मूल वेतन
- महंगाई भत्ता
- मकान किराया भत्ता
- यात्रा भत्ता
- पद या विभाग से संबंधित विशेष भत्ते
वहीं NPS योगदान, आयकर, CGHS और अन्य कटौतियों के बाद मिलने वाली रकम in-hand salary कहलाती है। इसलिए एक ही बेसिक पे वाले दो कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी पोस्टिंग शहर और कटौतियों के कारण अलग हो सकती है।
किस वेतन आयोग में सबसे अधिक प्रतिशत वृद्धि हुई?
न्यूनतम मूल वेतन की सीधी तुलना में चौथे से पांचवें वेतन आयोग के बीच सबसे अधिक 240 प्रतिशत वृद्धि दिखाई देती है।
इसके बाद पांचवें से छठे आयोग में लगभग 174.5 प्रतिशत और छठे से सातवें आयोग में लगभग 157.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होती है। लेकिन इन प्रतिशतों को वास्तविक टेक-होम सैलरी वृद्धि नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि प्रत्येक आयोग में DA के विलय और वेतन निर्धारण की पद्धति अलग रही।
निष्कर्ष
वर्ष 1986 से 2016 के बीच केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹750 से बढ़कर ₹18,000 हो गया। तीन दशकों में यह 24 गुना वृद्धि है। वहीं सर्वोच्च मूल वेतन ₹9,000 से बढ़कर ₹2.50 लाख तक पहुंच गया।
ये आंकड़े बताते हैं कि प्रत्येक वेतन आयोग ने वेतन-संरचना में बड़ा बदलाव किया, लेकिन किसी व्यक्तिगत कर्मचारी को मिला वास्तविक फायदा उसके पद, पुराने वेतन, फिटमेंट, भत्तों और कटौतियों पर निर्भर रहा।
डिस्क्लेमर: लेख में दी गई वृद्धि न्यूनतम और अधिकतम मूल वेतन की ऐतिहासिक तुलना है। इसे सभी कर्मचारियों की वास्तविक, सकल या इन-हैंड सैलरी में हुई समान वृद्धि न माना जाए।
